What is Vilambit or Bada Khyal विलम्बित या बड़ा ख्याल क्या है

Vilambit lay

It is sung in a Vilambit lay, perhaps that is why it is called Vilambit or Bada Khayal. Tabla is used with it and the talas of Ektal, Tilwara, Jhumra, Jhaptaal, Aaddha chartaal etc. are played. In the Bada khayal, the words are very few and the khayal has only 2 parts – Sthai and Antara.

Alap

A little alap is sung before singing Bada Khyal. Alap can be done in Aakar or in Nom-Tom. Nom Tom is used in the Dhrupad-Dhamar, but it is also used before the Khayal.

After the Sthai-Antara song of Khayal, then after we sing the Mukhda of the Sthai and as per the law of raga, then we do Badhat of swaras. Some Ustads say that there should be Alap in the middle of the Khayal, but some people say that there should be an Badhat of the swaras in the words of the Khayal. It will be beneficial that on one hand the size of the Alap will be reduced a bit and on the other hand we can increase our feeling through words and swaras.

Alap is decorated by Kan, Khatka, Meend etc. After Alap, Bahlava, taan of dugun or chaugun, Bolataan, Bol-Banaao with lay, Sargam-Taan, etc. are performed.

Sadarang-Adarang

Sadarang (Nyamat Khan) and Adarang (Naubat Khan) composed many Khayal and preached the Khayal by teaching their disciples, but they themselves used to sing Drupada.


विलंबित लय

यह विलंबित लय में गाया जाता है शायद इसीलिए इसे विलंबित या बड़ा ख्याल कहते हैं। इसके साथ तबले का प्रयोग होता है और इसमें एकताल, तिलवाड़ा, झुमरा, झपताल, आड़ाचारताल आदि ताल बजाए जाते हैं। बड़े ख्याल में शब्द बहुत कम होते हैं और गीत के केवल 2 भाग होते हैं स्थाई और अंतरा

आलाप

बड़ा ख्याल गाने से पहले थोड़ा आलाप गाया जाता है। आलाप को आकार में अथवा नोम तोम में भी कर सकते हैं। नोम-तोम का आलाप ध्रुपद-धमार में किया जाता है लेकिन इसका उपयोग बड़ा ख्याल गाने के पहले भी करते हैं।

ख्याल की स्थाई अंतरा गाने के बाद फिर स्थाई का मुखड़ा गाते हैं और राग के नियम के अनुसार स्वरों की बढ़त करते हैं। कुछ विद्वान कहते हैं खयाल के बीच आकार में आलाप होना चाहिए पर कुछ लोग कहते हैं की गीत के शब्दों को लेकर स्वरों की बढ़त होनी चाहिए। इससे यह लाभ होगा कि एक ओर आकार के आलाप थोड़े कम होंगे और दूसरी ओर शब्दों और स्वरों के जरिए हम अपना भाव वृद्धि कर सकते हैं।

आलाप को कण, खटका, मींड आदि द्वारा सजाया जाता है। आलाप करने के बाद बहलावा, बराबर दुगुन अथवा चौगुन की तान, बोलतान, लय के साथ बोल-बनाव, सरगम-तान इत्यादि किया जाता है।

सदारंग-अदारंग

सदारंग (न्यामत खां) और अदारंग (नौबत खां) ने अनेक खयालों की रचना की और अपने शिष्यों को सिखा कर ख्याल का प्रचार किया, लेकिन यह स्वयं द्रुपद गाते थे।


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