Pitch, Intensity / Loudness, Quality तारता, तीव्रता और गुण

The sounds or musical sounds are distinguished from each other by three characteristics.
1. Pitch
2. Intensity/Loudness
3. Quality

Pitch

It is a matter of ordinary experience that we hear and recognize one sound differently from the other, through low or high pitch. Music students understand very well what sound is high and which is low. Just like the sound of Ga is higher than the sound of Re. It is important to give this test of sound at the beginning of the music education. How high or low a Swar is from another or how high it is according to Sa, this symptom is called Pitch (Tarta).

Intensity/Loudness

We know that they can vary in intensity even when the two sounds are similar. For example, if a wire is pierced slowly, the sound that will come out of it will not be heard far away, that is, its intensity will be less. But if the same chord is pierced aloud, then even if there is no difference in the pitch of the sound, its intensity will increase i.e. that it will be heard far away.

Quality

The third characteristic of sound is its quality. There is a quality that is completely different from the pitch and intensity of sound, so that we know from which instrument the sound came out or the human came out of the throat.


नाद या संगीत उपयोगी ध्वनियाँ तीन लक्षणों से एक दूसरी से अलग पहचानी जाती है।
१. तारता या उँचापन-निचापन (Pitch)
२. तीव्रता या छोटा-बड़ा (Loudness)
३. गुण (Quality)

तारता

यह साधारण अनुभव की बात है की तरता या उँचे-नीचें से एक ध्वनि को दूसरे से हम अलग सुनते और पहचानते हैं। संगीत के विद्यार्थी इस चीज़ को बहुत अच्छे से समझते हैं की कौन सी ध्वनि उँची है और कौन सी नीची। जैसे गंधार की ध्वनि षडज की ध्वनि से उँची है। ध्वनि की यह परख संगीत सिक्षा के शुरू में ही देना महत्वपूर्ण होता है। एक स्वर दूसरे से कितना उँचा या नीचा है या षडज से उसका कितना उँचा-निचापन है, इसी लक्षण को तारता कहते हैं।

तीव्रता

हम यह जानते हैं कि दो ध्वनियों की तारता समान होने पर भी वे तीव्रता में भिन्न हो सकती है। जैसे यदि किसी तार को धीरे से छेड़ा जाएगा तो उससे जो ध्वनि निकलेगी वह बहुत कम दूर तक सुनाई देगी यानी उसकी तीव्रता कम होगी। किंतु यदि उसी तार को जोर से छेड़ा जाए तो ध्वनि की तारता में कोई अंतर ना आने पर भी उसकी तीव्रता बढ़ जाएगी यानी वह अधिक दूर तक सुनाई देगा।

गुण

ध्वनि की तीसरी विशेषता उसका गुण है। ध्वनि की तारता और तीव्रता से बिल्कुल अलग एक ऐसा गुण है जिससे हम यह जान लेते हैं कि ध्वनि किस वाद्य यंत्र से निकली है अथवा मनुष्य कंठ से निकली है।


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