What is Raga? What are its symptoms? राग क्या है, इसके लक्षण क्या हैं ?

“A beautiful composition of at least five and above nine swaras, which are good to ears, are called Raag.”

Pandit Jasraj says:

Raga is what we can sing for hours. Every raag has its own frame, in which we sing. Frames of different Raags are also different and the method of singing is also different. In Raag you can sing whatever comes in your heart, but staying inside the frame.

Symptoms of Raga

In the present time, there are some following signs of Raag:

1. Raga has at least five swars and more than nine swars. Less than five swars make no Raag.

2. Each raga has been thought to originate from some place. But the concept of raga is long before the time of Thaat, when Thaat was born, then the ragas were distributed according to the qualities of every thaat.

3. Sa will present in all Raags, because it is the basis of the octave.

4. There should be at least one swar Ma or Pa in each and every raga. Both swars are not taboo together. In any raga, it is possible that Pa and Suddh Ma is not present, but there will Tibra Ma present in the Raag.

5. In the Raag, Arohan-Avarohan, Wadi-Samvadi, Pakar, Time etc are necessary.

6. In any Raag, both forms of swar should not be used simultaneously after each other. For example, Komal Re and Suddh Re or Komal Ga and Suddh Ga should not come together in any raga. It is possible to use Suddh swar in the Arohan and Komal in Avarohan.


“कम से कम पांच और अधिक से अधिक नौ स्वरों की सुंदर रचना जो कानों को अच्छी लगे उसे राग कहते हैं।”

पंडित जसराज कहते हैं-

राग वो है जिसे हम घंटो गा सकते हैं। हर राग के स्वरों का अपना फ्रेम है, जिसमें हमलोग गाते हैं। अलग अलग राग का फ्रेम भी अलग अलग है और गाने का तरीका भी अलग है। राग में आप अपना दिल में जो आए वो गा सकते हैं पर फ्रेम के अंदर रहकर।

राग के लक्षण

अभी के समय में राग कुछ निम्नलिखित लक्षण हैं-

१. राग में कम से कम पांच स्वर और अधिक से अधिक नौ स्वर होते हैं। पांच स्वरों से कम का राग नहीं बनता।

२. प्रत्येक राग को किसी न किसी थाट से उत्पन्न माना गया है। पर राग कि अवधारणा थाट से बहुत पहले की है, बाद में जब थाट की उत्पत्ति हुई तो हर थाट के गुण के अनुसार रागों को बांट दिया गया।

३. किसी भी राग में सा वर्जित नहीं होता है, क्यूंकि यह सप्तक का आधार है।

४. प्रत्येक राग मेंऔरमें से कम से कम एक स्वर अवश्य रहना चाहिए। दोनों स्वर एक साथ वर्जित नहीं होते। किसी राग मेंके साथ शुद्ध म वर्जित है तो उसमें तीव्र म अवश्य रहता है।

५.प्रत्येक राग में आरोह-अवरोह, वादी-संवादी, पकड़, समय इत्यादि आवश्यक है।

६.किसी भी राग में स्वर का दोनों रूप एक साथ एक दूसरे के बाद नहीं प्रयोग होना चाहिए। जैसे- कोमल रे और शुद्ध रे अथवा कोमल ग और सुद्ध ग दोनों किसी राग में एक साथ नहीं आने चाहिए। यह संभव है कि आरोह में सुद्घ स्वर और अवरोह में कोमल का प्रयोग किया जाए। जैसे राग खमाज के आरोह में शुद्ध नि और अवरोह में कोमल नि का प्रयोग किया जाता है।


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✓What is Raag? राग क्या है ?


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