What is Thumri ठुमरी गायकी क्या है

Thumri

Compared to the purity of Raag in Thumri, the importance of beauty is given more importance. Thumri is more agile than khayal. Thumri Khamaj, Desh, Tilak Kamod, Tilang, Peelu, Kafi, Bhairavi, Jhinjoti, Jogiya etc. are sung in Ragas. Deepchandi or Jat Taal is played with it.

The words in Thumri are less. The part of the words is expressed by various swar groups. In this, the Melody is important and the Meend-Kan is used extensively. After working in a Sthai-Antara, when the song comes back to Sthai, then the Kaharva falls in the rhythm. The Singer and Tabliya both make different types of beautiful lyrics and after some time they re-enter the original Taal.

Gharana

Thumriars of Benaras, Lucknow and Punjab are especially famous. To enhance beauty in Thumrii show different shadows of ragas. Many people believe that it was invented by the last Nawab of Lucknow Wajid Ali Shah ‘Akhtarpiya’.


ठुमरी

ठुमरी में राग की शुद्धता की तुलना में भाव सौंदर्य पर अधिक महत्व दिया जाता है। खयाल की तुलना में ठुमरी चपल होती है। ठुमरी खमाज, देश, तिलक कामोद, तिलंग, पीलू, काफी, भैरवी, झिंझोटी, जोगिया आदि रागों में गाई जाती है। इसके साथ दीपचंदी या जत ताल बजाया जाता है।

ठुमरी में शब्द कम होते हैं। शब्दों के भाग को विविध स्वर समूहों द्वारा व्यक्त किया जाता है। इसमें श्रृंगार रस प्रधान होता है और मींड-कण का खूब प्रयोग होता है। स्थाई अंतरा में काम करने के बाद जब पुनः गीत की स्थाई में आते हैं तो कहरवा ताल में आ जाते हैं। गायक और तबलिया दोनों विभिन्न प्रकार के सुंदर बोल बनाते हैं और कुछ देर के बाद पुनः पूर्व ठेके में आ जाते हैं।

घराना

बनारस, लखनऊ और पंजाब की ठुमरियां विशेष रूप से प्रसिद्ध है। ठुमरी में सुंदरता बढ़ाने के लिए विभिन्न रागों की छाया दिखाते हैं। बहुत लोगों का मानना है इसका आविष्कार लखनऊ के अंतिम नवाब वाजिद अली शाह ‘अख्तरपिया’ ने किया था।


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