What is Parmel Praveshak raag परमेल प्रवेशक राग क्या है

Parmel Praveshak raag

The raga which enters from one Thaat to another is called Parmaal Pravesh Raga. Just like Jaijaivanti is the Parmel praveshak raag. Its singing time is the last part of the last stroke of the night.
Before this, the ragas of Khamaj Thaat are over and the time of the ragas of Kafi Thaats is coming.

Jaijaiwanti is one such raga which enters the Kafi from Khamaj Thaat. Because it has the characteristics of both. In Khamaz, Re, Ga are shuddh and both Nishad uses, and on the other hand, komal Ga and both Nishad are used in Kafi. Jaijaivanti has both characteristics and both the nishad are also used along with shuddh swaras. That is why it has been called the Parmel Praveshak raag. Raga Multani and Marwa are also Parmel Praveshak raag.


परमेल प्रवेशक राग

जो राग एक थाट से दूसरे थाट में प्रवेश कराते हैं उसे परमेल प्रवेशक राग कहते हैं।
जैसे जैजैवंती परमेल प्रवेशक राग है। इसका गायन समय रात के अंतिम प्रहर का अंतिम भाग है।
इसके पहले खमाज थाट के राग खत्म हो चुके हैं और काफी थाट के रागों का समय आने वाला होता है।

जैजैवंती ऐसा ही राग है जो खमाज थाट से काफी में प्रवेश कराता है। क्योंकि इसमें दोनों की विशेषताएं होती हैं। खमाज में रे, ग शुद्ध और दोनों निषाद प्रयोग होते है और दूसरी ओर काफी में गंधार कोमल होता है और ज्यादातर दोनों निषाद प्रयोग होते हैं। जैजैवंती में दोनों ही विशेषताएं हैं और इसमें शुद्ध स्वरों के साथ-साथ दोनों निषाद भी प्रयोग में आते हैं। इसीलिए इसे परमेल प्रवेशक राग कहा गया है। राग मुल्तानी और मारवा भी परमेल प्रवेशक राग हैं।


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