What to do Riyaz in the morning and evening सुबह शाम का रियाज़ क्या करें

At the beginning of Riyaz

Get up early in the morning and do some pranayama and then sit back in peace and start riyaz. At the beginning of Riyaz, do Riyaz of Sa for the first time daily. After that, the Riyaz of Holding notes, then do Riyaz of Paltas or Alankars. It is to be so riyaz everyday. In the morning or in the evening, whenever you sit for Riyaz, it is necessary to start this practice firstly. Any raga is practiced only after doing so.

Morning Evening Riyaz

There is no division in Riyaz in the morning and evening. You can do any riyaz in both the morning and evening. Some people believe that Riyaz of Sa and Holding notes Riyaz are only in the morning, but this is not the case.

Some people also believe that Raag Bhairav‘s Riyaz should be done only in the morning and Raag Yaman should be done only in the evening, but this is not true either. When our guru teaches Raag Bhairav, then in the morning or in the evening, that raga is performed day and night. Whether it is in the morning or in the evening, we do not have to see the time, just have to riyaz. You can Riyaz any raga at any given time, the benefit will be equal. Just have to sit down and Riyaz with proper concentration.


रियाज के शुरुआत में

सुबह उठकर सबसे पहले थोड़ा प्राणायाम कर ले फिर शांति से बैठकर रियाज शुरू करें। रियाज के शुरुआत में प्रतिदिन सबसे पहले सा का रियाज़ करना चाहिए। उसके बाद होल्डिंग नोट्स का रियाज उसके बाद पलटा या अलंकार का रियाज किया जाता है। इतना रियाज प्रतिदिन करना है। सुबह हो या शाम हो आप जब भी रियाज करने बैठिए तो शुरुआत में सबसे पहले इतना रियाज करना जरूरी है। इतना रियाज करने के बाद ही किसी राग का अभ्यास किया जाता है।

सुबह और शाम के रियाज

सुबह और शाम के रियाज में कोई बंटवारा नहीं है। आप कोई भी रियाज सुबह और शाम दोनों वक्त में कर सकते हैं। कुछ लोगों का मानना है कि सा का रियाज़ और होल्डिंग नोट्स का रियाज सिर्फ सुबह में ही होता है पर ऐसा नहीं है।

कुछ लोग यह भी मानते हैं कि राग भैरव का रियाज सिर्फ सुबह में ही करना चाहिए और राग यमन का रियाज सिर्फ शाम में करना चाहिए पर यह बात भी सही नहीं है। जब हमारे गुरु राग भैरव की तालीम देते हैं तब सुबह हो या शाम हो, दिन रात उस राग का रियाज किया जाता है। जब भी वक्त मिले उसका अभ्यास किया जाता है ताकि राग सही तरह से गले में बैठ जाए। फिर चाहे वह सुबह हो या शाम हो हमें वक्त नहीं देखना है, बस रियाज करना है। आप किसी भी राग को किसी भी वक्त रियाज कर सकते हैं, फायदा बराबर ही मिलेगा। बस दिल से रियाज़ करने बैठना है।


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