Riyaz of Alankars Paltas Sargam on all Thaat Right/Wrong Facts सभी थाटो पर अलंकार या पलटा का रियाज़

It is very important to Understand

It is very compulsory to practice on the thaats. But my thinking is that first of all clear your concept that what is raag, what is thaat and how they are connected to each other and which one is how much important and if we understand which and how we will practice it. We have to know the schedule.


Thaat is a combination of many raags. Thaat is not a very old concept. Thaat is just like a box where various raags are kept according to their characteristics. Every thaats have seven swar how much arohan that much abarohan. Seven swar in arohan & seven in abarohan.

So, the work of thaat is to differentiate than raags. We sing the raags, not thaats. Bhairab thaat is another thing & bhairab raag is another thing…

Basic practice

Alankar/Palta are for making the voice clear like…if we want we can sing it at any swar. If totally pure swar (bilawal) people says we are practicing at bilawal thaat. So, If we practice on that thaat then can we practice on another. Yes we can, But first of all its impotent to learn that the alankars are made that must came to our voice totally clear. Rules are that follow the basic lessons of alankars and practice it from the beginning every day and when it over then go to raag. Through raag only all soft and clear music are practiced. So, first of all learn the alankar for some months then go to raag. So, focus of on pure swar then you will get result. For more information about this topic then must watch the video for more concept.

यह समझना बहुत ज़रूरी है

“ऐसा लोग समझते हैं की सभी थाटो पर अलंकार या पलटा का रियाज़ करना ज़रूरी है, ऐसे रियाज़ करना कोई ग़लत नही है पर मेरा मानना है की पहले सुद्ध स्वरों पर अगर सही ढंग से स्वर की पहचान हो जाए तो सभी थाटो पर रियाज़ ज़रूरी नही है
मैं समझता हूँ की सही ढंग से सुद्ध स्वरों की पहचान और अलंकार का रियाज़ करते करते लगभग दो साल लग जाते हैं


अगर हम थाटो की संख्या जाने तो अभी कुल १० थाट हैं
तो मान लीजिए बिलावल थाट में सभी सुद्ध स्वर उपयोग होते हैं तो २ साल इस थाट पर अलंकार का रियाज़ करने के बाद
फिर भैरव थाट पर शुरू कीजिएगा तो फिर सभी अलंकार ख़त्म करने में फिर २ साल लगेंगे
और अगर हम सभी थाटो पर अलंकार का रियाज़ करके १० सालों मे तैयारी भी कर ली स्वरो का तो कोई ठीक नही है की सभी स्वर का ज्ञान हो ही गया हो

शुरुआती अभ्यास

तो मेरा मानना है की सबसे अच्छा इसी में है की सही ढंग से सुद्ध स्वरों का रियाज़ करके राग और गायकी सीखने पे ध्यान देना ही सही है जिससे की हमे स्वर पहचानना और राग सीखना और समझना भी शुरू हो जाएगा
और जैसे ही राग सीखना समझना शुरू हो जाएगा वैसे ही कोमल स्वर और टोबरा स्वर का ज्ञान भी हो जाएगा और गले मे भी गायकी आने लगेगी

तो मैं बस इतना कहूँगा की अच्छे से सीखिए और समझदारी के साथ सीखिए

और भी अगर कुछ बातें समझनी हो तो वीडियो ज़रूर देखिए।

सभी थाटो पर अलंकार या पलटा का रियाज़ Riyaz of Alankars Paltas Sargam on all Thaat Right/Wrong Facts

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