Should the Ragas be performed according to time क्या राग को समय के अनुसार ही रियाज करना चाहिए

Many people think

Many people think that it is better to have any Raag sing at his own time. As some people start getting up in the morning and start practicing Bhairav and then other lessons. I am talking about Beginners, some people riyaz Yaman only during the evening.

I will talk straight and clear

I will talk straight and clear. Those who have started learning should pay attention to Palta and Alankar. When Palta Alankar is ready, Riyaz should come in the Vocal, after some months, then it should start learning the raga. When the raga starts to learn, then do not see the time in it, whether it is a Guru, morning or evening, the raga that is running has to be practiced. If you practice the Raga Bhairav only if you do it in the morning, it will not work for 1 hour or 2 hours. You will have to prepare that Raag by working hard day and night.

The most important thing

So the most important thing is that whenever you start to riyaz, start with the Basic Lation, Riyaz of Palta Alankar. Then practice the raga which is going on. Similarly, daily riyaz has to be done. There is no time to think about which time of Raag. After a few months, when you will learn the Raag, while singing you can choose the Raag according to the time of singing.


बहुत से लोग ऐसा सोचते हैं

बहुत से लोग ऐसा सोचते हैं कि किसी भी राग का रियाज उसके समय पर करना ही ठीक होता है। जैसे कुछ लोग सुबह उठकर राग भैरव का रियाज़ करना शुरू करते हैं और फिर पलटा अलंकार, बेसिक लेशंस को किसी और वक्त करते हैं। मैं बिगनर्स की बात कर रहा हूं, कुछ लोग राग यमन को बस शाम के वक्त ही रियाज़ करते हैं।

मैं सीधी और साफ बात करूंगा

मैं सीधी और साफ बात करूंगा। जो सीखना शुरू किए हैं उन्हें पलटा और अलंकार पर ध्यान देना चाहिए। जब पलटा अलंकार तैयार हो जाए, गले में रियाज़ आ जाए कुछ महीनों के बाद तब राग को सीखना शुरू करना चाहिए। जब राग सीखना शुरू होता है तो उसमें समय नहीं देखते हैं गुरु, सुबह हो या शाम हो जो राग चल रहा है उसका अभ्यास करना पड़ता है। जैसे राग भैरव का अभ्यास अगर सिर्फ आप सुबह की सुबह कीजिएगा 1 घंटे या 2 घंटे तो उससे काम नहीं बनेगा। आपको दिन-रात मेहनत करके उस राग को तैयार करना पड़ेगा।

सबसे महत्वपूर्ण बात

तो सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि जब भी रियाज करने बैठिये तो शुरुआत जो बेसिक लेशन है पलटा अलंकार के रियाज़ से शुरू कीजिए। फिर जो राग चल रहा है उस राग का अभ्यास कीजिए। इसी प्रकार हर दिन रियाज करना होता है। रियाज के शुरुआत में बेसिक लेशंस फिर राग को लेकर बैठा जाता है। इसमें समय नहीं सोचना है कि किस राग का समय है।कुछ महीनों के बाद जब राग सीख लेंगे तब गायकी करते वक्त आप समय के अनुसार राग को पसंद कर सकते हैं गायकी करने के लिए।


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