In Which Raag or Thaat, Riyaz of Palta/Alankar should practice किस राग या थाट में पल्टा/अलंकार का अभ्यास करना चाहिए

Riyaz of Alankar

Riyaz of Alankar should never be used for any Komal or Tivra Swar (At the beginneing). Alankars is always done to make your throat correct and to understand the swar. For those who have started learning, it is very important for them to understand how to practice Alankars.

To many people it is to say that we are doing riyaz of Paltas or Alankars on Suddh Swaras, but how to Riyaz of Komal and Tivra Swaras. In order to practice these Swaras, it is necessary to Riyaz of Palta/Alankars on some raga or thaats. But I would say that it is not like that. Let’s just take a closer look at how to Riyaz Komal and Tivra Swaras.

First of all

First of all, Let’s Understand that in the beginning, how will the Riyaz of the Palta/Alankars begin. It is also understandable how to Riyaz Komal and Tivra Swaras after a few months of practice.

In the beginning

In the beginning, when using Palta/Alankars, it is necessary to use the Suddh swaras for Riyaz. There should be no singing on the voices while doing riyaz. Because the main purpose of Riyaz of palta/alankar is to understand Sur and prepare your throat.

If you think that by doing Paltas/Alankars on different Raag or Thaat, you will get a good catch on Komal and Tivra Swaras, then this is a wrong thought. First of all, Swar recognition is obtained by performing Palta Alankars. When the Swar knowledge is attained then you can sing it in a right Sur (pitch) by thinking of any swar. When the Riyaz of Palta Alankar is done a few months then the raga gets started. The practice of Komal Tivra Swaras starts even after starting the raga. We learn to recognize Komal and Tivra Swaras on the basis of Raag.

Riyaz

There can be no loss from the Riyaz of Palta/Alankars on any Thaat or Raag. But I have to say that during the learning of Raag, there is a good grip on Komal and Tivra Swaras while practicing the identity of Raag, taan, sargam of raag. For those who have started learning, I will say that the riyaz of the Palta Alankars should be done only by Suddh swaras correctly and prepare your throat. When the throat will be ready, after all learning the Raag, Riyaz of all Komal and Tivra Swaras starts to happen by itself. In the beginning, the more time you give up on the Palta Alankars, your throat will be much better prepared.


अलंकार का रियाज

अलंकार का रियाज कभी भी किसी कोमल स्वर या तीव्र स्वर (शुरुआत में) के लिए नहीं करना चाहिए। अलंकार हमेशा अपने गले को सही बनाने के लिए होता है और सुर को समझने के लिए होता है। जिन्होंने सीखना शुरू किया है उनके लिए यह समझना बहुत जरूरी है की अलंकार का रियाज कैसे करते हैं।

बहुत लोगों का यह कहना है कि पलटा या अलंकार का रियाज तो हम शुद्ध स्वरों में रियाज करते ही हैं पर कोमल और तीव्र स्वर का रियाज कैसे करेंगे। इन स्वरों का रियाज करने के लिए तो पलटा अलंकार को किसी ना किसी राग या थाट पर करना जरूरी हो जाता है। पर मैं कहूंगा कि ऐसा नहीं है। आइए इस बात को जरा ध्यानपूर्वक समझते हैं की कोमल और तीव्र स्वरों का रियाज कैसे करेंगे।

सबसे पहले

सबसे पहले यह समझते हैं कि शुरुआत में पलटा अलंकार का रियाज कैसे करेंगे। पलटा अलंकार का रियाज कुछ महीने हो जाने के बाद कोमल और तीव्र स्वरों का रियाज कैसे किया जाता है यह भी समझते हैं।

शुरुआत में

शुरुआत में पलटा या अलंकार का रियाज करते समय सीधा स्वर का प्रयोग करना है। रियाज करते वक्त स्वरों पर कोई गायकी नहीं होनी चाहिए। क्योंकि पलटा अलंकार के रियाज का मुख्य उद्देश्य है सुरों को समझना और अपना गला तैयार करना।

अगर आप समझते हैं कि अलग अलग थाट या राग पर पलटा अलंकार का रियाज करने से कोमल और तीव्र स्वरों पर अच्छा पकड़ बन जाएगा तो यह गलत सोच है। सबसे पहले पलटा अलंकार का रियाज करके स्वर ज्ञान प्राप्त किया जाता है। स्वर ज्ञान जब प्राप्त हो जाता है तो आप कोई भी स्वर सोच कर उसे सुर में गा सकते हैं। जब पलटा अलंकार का रियाज कुछ महीने हो जाता है तब राग शिक्षा शुरू की जाती है। राग के शुरू करते ह ही कोमल तीव्र स्वरों का अभ्यास भी शुरू हो जाता है। हम लोग राग के आधार पर कोमल और तीव्र स्वरों को पहचानना सीखते हैं। राग के तानों को खूब रियाज करके अपने गले को तैयार किया जाता है।

रियाज

किसी भी थाट का राग पर पलटा अलंकार का रियाज कर सकते हैं इसमें कोई हानि नहीं है। पर मेरा कहना है राग सीखने के दौरान राग की पहचान, तान, सरगम का अभ्यास करते करते कोमल और तीव्र स्वर पर अच्छी पकड़ बन जाती है। जिन्होंने सीखना शुरू किया है उनके लिए मैं यही कहूंगा कि पलटा अलंकार का रियाज सिर्फ शुद्ध स्वर ऊपर सही ढंग से करें और अपना गला तैयार करें। गला जब तैयार हो जाएगा उसके बाद राग सीखने के दौरान सभी कोमल और तीव्र स्वरों का रियाज खुद-ब-खुद होने लगता है। शुरुआत में जितना ज्यादा वक्त अप पलटा अलंकार पर देंगे आपका गला उतना ज्यादा तैयार होगा।


Watch Video:

सभी थाटो पर अलंकार या पलटा का रियाज़ Riyaz of Alankars Paltas Sargam on all Thaat Right/Wrong Facts

राग सीखने का सही तरीका

Thaat and Raag difference थाट और राग में अंतर Full detail concepts


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2 thoughts on “In Which Raag or Thaat, Riyaz of Palta/Alankar should practice किस राग या थाट में पल्टा/अलंकार का अभ्यास करना चाहिए

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