When will you understand the Sur सुर की समझ कब होगी How to understand right Pitch

To sing any song, it is very important to understand the Sur. Any of the singers sing good only when they sing in the Sur. If you sing out of Sur then singing will not be good. Understanding the notation of any song should sing in the right way. Now understand how it will understand.

When Singing education is received from the right guru, then gradually starts understanding after starting a few months correctly. When we start learning, then we first understand Tanpura or Harmonium, take a bit of Riyaaz. By listening to the sound of the harmonium or tanpura with the help of a guru, we practice the Riyaz of Sa. After a few days of Riyaz, the sound of a bit sits in our brain and then slowly starts to understand the sound of Sa. In this way we again understand the Sur and riyaz.

The practice of Riyaz gradually increases with the help of the guru. We again practice Palta or Alankar for a few months. During Riyaz of Palta or Alankar, we begin to understand the Sur and after hearing any swar we start to understand. In this way, learning to Raag begins. After a few years of learning, a time comes when we hear any song and understand what its notation is. It is very easy to understand which song is in the raga.


किसी भी गीत को गाने के लिए सुर की समझ होनी बहुत जरूरी है। कोई भी गायकी तभी अच्छी लगती है जब वो सुर में गाये जाएं। अगर बेसुरे होकर गाइएगा तो गाना अच्छा नहीं लगेगा। किसी भी गाने के नोटेशन को समझ के सही सुर में गाना चाहिए। अब सुर की समझ होगी कैसे ये समझते हैं।

जब सही गुरु से शिक्षा प्राप्त होती है तब धीरे धीरे कुछ महीनों के बाद सही तरीके से शुरू की समझ होने लगती है। हम लोग जब सीखना शुरू करते हैं तो तानपुरा या हरमोनियम पर सबसे पहले सा को समझते हैं, सा का रियाज़ करते हैं। गुरु की सहायता से हारमोनियम या तानपुरे की आवाज को सही ढंग से सुन कर हम सा का रियाज़ करते हैं। कुछ दिन के रियाज के बाद सा की आवाज हमारे मस्तिष्क में बैठ जाता है और फिर धीरे-धीरे सा का सुर समझ आने लगता है। इसी तरीके से फिर हम लोग आगे की सुर को समझते हैं और रियाज करते हैं।

गुरु की सहायता से धीरे धीरे रियाज का अभ्यास बढ़ने लगता है। हम लोग फिर कुछ महीने पल्टा या अलंकार का रियाज़ करते हैं। पल्टा या अलंकार के रियाज़ के दौरान ही हमें सुर की समझ होने लगती है और किसी भी स्वर को सुनकर हम समझने लगते हैं। इसी प्रकार फिर राग सीखना आरंभ होता है और सीखते सीखते सुर की समझ और बढ़ने लगती है। कुछ साल सीखने के बाद एक वक़्त आता है जब हम कोई भी गीत सुनकर समझ जाते हैं कि उसका नोटेशन क्या है। गीत कौन से राग में है ये भी समझना बहुत आसान हो जाता है।


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✓When will you understand the Sur सुर की समझ कब होगी ?? How to understand right Pitch


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